नारंगी पहाड़ और चाँद वाले बिस्कुट

नन्हे हाथी गोलू ने अपनी सूंड उठाई और बड़े ताज्जुब से देखा। उसके बाग़ान के बीचों-बीच आज एक बहुत बड़ा, नारंगी रंग का पहाड़ उगा था। गोलू ने अपना नीला…

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Published 2026-04-06T08:21:51.236758

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धीरे पढ़ें, शांत शब्द दोहराएँ, और आख़िरी पंक्ति को बहुत नरम आवाज़ में बोलें।

Story

नन्हे हाथी गोलू ने अपनी सूंड उठाई और बड़े ताज्जुब से देखा। उसके बाग़ान के बीचों-बीच आज एक बहुत बड़ा, नारंगी रंग का पहाड़ उगा था। गोलू ने अपना नीला मफ़लर ठीक किया और अपने दोस्त टीटू डाइनोसॉर को आवाज़ दी। टीटू के हरे शरीर पर गोल-गोल पीले धब्बे थे जो धूप में चमक रहे थे। दोनों ने एक-दूसरे का हाथ पकड़ा और फुसफुसाते हुए कहा, "धीरे चलो, धीरे चलो, श्शश!" क्या यह पहाड़ बोलता है? क्या यह पहाड़ चलता है? वे दोनों दबे पाँव उस बड़े से पहाड़ की तरफ़ बढ़ने लगे।

तभी उस पहाड़ के अंदर से एक तेज़ आवाज़ आई—"खर्र-खर्र, खर्र-खर्र!" गोलू और टीटू डरकर रुक गए। अरे, यह तो पहाड़ के खर्राटे थे! अचानक उस नारंगी पहाड़ के ऊपर से एक लंबी, मखमली पूँछ बाहर निकली और हवा में लहराने लगी। वह कोई पहाड़ नहीं था, वह तो 'मीऊ-मीऊ' थी—एक बहुत बड़ी और प्यारी बिल्ली। मीऊ-मीऊ इतनी बड़ी थी कि वह घर के सोफ़े जैसी लगती थी। उसने एक बड़ी सी अंगड़ाई ली और अपनी सुनहरी आँखें खोलीं। इस बाग़ान का एक प्यारा सा नियम था: जब भी मीऊ-मीऊ अपनी पूँछ हिलाती, चमेली के सारे फूल खुशी से नाचने लगते थे।

मीऊ-मीऊ ने अपनी मखमली आवाज़ में पूछा, "क्या तुम मेरे साथ चाँद वाले बिस्कुट खाओगे?" गोलू हाथी और टीटू डाइनोसॉर खुशी से उछल पड़े। मीऊ-मीऊ ने अपनी जादुई टोकरी में से गोल-गोल बिस्कुट निकाले, जो बिल्कुल असली चाँद की तरह चमक रहे थे। जब गोलू अपनी सूंड से बिस्कुट पकड़ता, तो कुरकुरी आवाज़ आती—"कड़म-कड़म!" और टीटू जब बिस्कुट खाता, तो उसके पीले धब्बे और भी चमकने लगते। तीनों दोस्त घास पर बैठकर बिस्कुट खाते और मीठी बातें करते। वहाँ बस एक ही बात का ध्यान रखना था: बिस्कुट खाते समय सबको अपनी आँखें बंद करके मुस्कुराना पड़ता था।

सूरज छिपने लगा और आसमान का रंग हल्का गुलाबी हो गया। मीऊ-मीऊ बिल्ली ने अपना बड़ा सा नरम शरीर फैलाया और गोलू और टीटू को अपने पास बुला लिया। गोलू हाथी बिल्ली की पीठ पर सिर रखकर लेट गया और टीटू डाइनोसॉर उसकी लंबी पूँछ के पास दुबक गया। ऊपर आसमान में छोटे-छोटे तारे टिमटिमाने लगे। बाग़ान अब बिल्कुल शांत था और ठंडी हवा चल रही थी। बस एक ही प्यारी सी आवाज़ आ रही थी, "मीऊ-मीऊ, खर्र-खर्र..." तीनों दोस्त गहरी नींद में सो गए, जहाँ पहाड़ मखमली होते हैं और हर बिस्कुट चाँद जैसा चमकता है।

Scenes

बाग़ान में नारंगी पहाड़

नन्हे हाथी गोलू और उसके दोस्त टीटू डाइनोसॉर ने बाग़ान के बीचों-बीच एक बहुत बड़ा, नारंगी रंग का पहाड़ देखा। गोलू ने अपना नीला मफ़लर ठीक किया और दोनों दबे पाँव, फुसफुसाते हुए उस पहाड

नन्हे हाथी गोलू और उसके दोस्त टीटू डाइनोसॉर ने बाग़ान के बीचों-बीच एक बहुत बड़ा, नारंगी रंग का पहाड़ देखा। गोलू ने अपना नीला मफ़लर ठीक किया और दोनों दबे पाँव, फुसफुसाते हुए उस पहाड़ की तरफ़ बढ़ने लगे।

पहाड़ के खर्राटे

अचानक उस पहाड़ से 'खर्र-खर्र' की आवाज़ आई और एक लंबी मखमली पूँछ हवा में लहराने लगी। अरे, यह तो मीऊ-मीऊ थी—एक बहुत बड़ी और प्यारी बिल्ली! उसने अपनी सुनहरी आँखें खोलीं और चमेली के फू

अचानक उस पहाड़ से 'खर्र-खर्र' की आवाज़ आई और एक लंबी मखमली पूँछ हवा में लहराने लगी। अरे, यह तो मीऊ-मीऊ थी—एक बहुत बड़ी और प्यारी बिल्ली! उसने अपनी सुनहरी आँखें खोलीं और चमेली के फूल खुशी से नाचने लगे।

चाँद वाले बिस्कुट

मीऊ-मीऊ ने अपनी जादुई टोकरी से चमकते हुए चाँद वाले बिस्कुट निकाले। गोलू ने अपनी सूंड से बिस्कुट पकड़ा और 'कड़म-कड़म' खाने लगा। टीटू के खाते ही उसके पीले धब्बे और भी ज़ोर से चमकने ल

मीऊ-मीऊ ने अपनी जादुई टोकरी से चमकते हुए चाँद वाले बिस्कुट निकाले। गोलू ने अपनी सूंड से बिस्कुट पकड़ा और 'कड़म-कड़म' खाने लगा। टीटू के खाते ही उसके पीले धब्बे और भी ज़ोर से चमकने लगे।

गुलाबी शाम की झपकी

सूरज छिपने लगा और आसमान का रंग हल्का गुलाबी हो गया। मीऊ-मीऊ ने अपना बड़ा सा नरम शरीर फैलाया। गोलू बिल्ली की पीठ पर सिर रखकर लेट गया और टीटू उसकी लंबी पूँछ के पास दुबक गया।

सूरज छिपने लगा और आसमान का रंग हल्का गुलाबी हो गया। मीऊ-मीऊ ने अपना बड़ा सा नरम शरीर फैलाया। गोलू बिल्ली की पीठ पर सिर रखकर लेट गया और टीटू उसकी लंबी पूँछ के पास दुबक गया।

मीठे सपनो की दुनिया

ऊपर आसमान में छोटे-छोटे तारे टिमटिमाने लगे। बाग़ान बिल्कुल शांत था। बस मीऊ-मीऊ की प्यारी 'खर्र-खर्र' गूँज रही थी और तीनों दोस्त एक साथ गहरी, मीठी नींद में सो गए।

ऊपर आसमान में छोटे-छोटे तारे टिमटिमाने लगे। बाग़ान बिल्कुल शांत था। बस मीऊ-मीऊ की प्यारी 'खर्र-खर्र' गूँज रही थी और तीनों दोस्त एक साथ गहरी, मीठी नींद में सो गए।

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धीरे पढ़ें, शांत शब्द दोहराएँ, और आख़िरी पंक्ति को बहुत नरम आवाज़ में बोलें।