वो दिन जब बस्ते अंदर गए
मिया और लियो पहली बार अपने नए कमरे का दरवाज़ा खोलते हैं — और अंदर मिलती हैं रंग-बिरंगी कुर्सियाँ, नई दोस्त बिया, और एक छोटी धारीवाली मछली जो दिल में बस जाती है।
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Published 2026-05-24T17:27:24.773088

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Story
वो दिन जब बस्ते अंदर गए
मिया और लियो दोनों एक बड़े नीले दरवाज़े के सामने खड़े थे। मिया की पीठ पर पीला बस्ता था, लियो की पीठ पर लाल। मिया ने धीरे से कहा, "अंदर क्या होगा?" लियो ने कंधे उचकाए। "देखते हैं ना!"
दोनों ने मिलकर दरवाज़ा धकेला — और अरे वाह! कमरे में कितनी सारी चीज़ें थीं! खिड़कियों से धूप की लंबी-लंबी सुनहरी धारियाँ फर्श पर पड़ रही थीं। छोटी-छोटी रंग-बिरंगी कुर्सियाँ थीं। एक नरम गलीचे पर खिलौना जानवरों की टोकरी थी। और कोने में — एक बड़ा गोल शीशे का मछलीघर! उसमें तीन नारंगी मछलियाँ गोल-गोल घूम रही थीं। मिया ने शीशे से अपनी नाक लगा दी। एक मछली की पूँछ के पास एक छोटी सफ़ेद धारी थी। "नमस्ते, धारीवाली!" मिया ने बहुत धीरे से कहा।
उनकी टीचर थीं मिस प्लम। उनके घुंघराले भूरे बाल थे और उनके स्वेटर में बड़ी-बड़ी जेबें थीं। उन्हें पता था कि हर चीज़ कहाँ है। उन्होंने आर्ट टेबल दिखाई जहाँ एक टिन के डिब्बे में मोटे-मोटे क्रेयॉन रखे थे। किताबों की एक पूरी अलमारी थी। और एक लकड़ी के नीचे बक्से में चिकने-चिकने लकड़ी के टुकड़े।
लियो ने तुरंत ब्लॉक उठाए और ऊपर-ऊपर-ऊपर रखने लगा — और धड़ाम! सब गिर गए। लियो इतना हँसा कि उसका पेट हिलने लगा। पास में बैठी एक छोटी लड़की ने देखा और बोली, "मैं भी?" वो बिया थी — हरे स्वेटर में, गंभीर चेहरे वाली। लियो ने सबसे बड़ा ब्लॉक उसकी तरफ बढ़ाया, क्योंकि शुरुआत हमेशा सबसे बड़े से होती है। बिया मुस्कुराई — और उस गंभीर चेहरे में एक बहुत बड़ी मुस्कान छुपी हुई थी!
कहानी सुनने का वक्त आया तो सब बच्चे मछलीघर के पास वाले नरम गलीचे पर बैठ गए। मिस प्लम ने एक किताब पढ़ी — एक भालू की जिसे एक टोपी मिली थी। सब बच्चे झुककर हर पन्ना देखने लगे। मिया इतनी पास झुकी कि लियो ने फुसफुसाकर पूछा, "दिख रहा है कुछ?" मिया ने फुसफुसाकर कहा, "सब दिख रहा है!"
कहानी खत्म हुई, नाश्ते का वक्त आया। मिया ने एक बार और मछलीघर की तरफ देखा। धारीवाली मछली अभी भी गोल-गोल घूम रही थी। "कल मिलेंगे, धारीवाली," मिया ने धीरे से कहा। और उसके मन में कोई शक नहीं था — वो ज़रूर आएगी।
Scenes
नीले दरवाज़े के सामने

मिया और लियो दोनों उस बड़े नीले दरवाज़े के सामने खड़े थे। मिया की पीठ पर पीला बस्ता, लियो की पीठ पर लाल। मिया ने धीरे से कहा, "अंदर क्या होगा?" लियो ने कंधे उचकाए। "देखते हैं ना!"
कितनी सारी चीज़ें!

दोनों ने मिलकर दरवाज़ा धकेला — और अरे वाह! धूप की सुनहरी धारियाँ फर्श पर बिछी थीं। रंग-बिरंगी छोटी कुर्सियाँ, खिलौनों की टोकरी, और कोने में एक बड़ा गोल मछलीघर जिसमें तीन नारंगी मछलियाँ गोल-गोल घूम रही थीं। मिया ने शीशे से नाक लगाई। एक मछली के पास छोटी सफ़ेद धारी थी। "नमस्ते, धारीवाली!" उसने धीरे से कहा।
लियो और बिया

लियो ने ब्लॉक ऊपर-ऊपर-ऊपर रखे — और धड़ाम! सब गिर गए। वो इतना हँसा कि पेट हिल गया। पास बैठी बिया ने गंभीर चेहरे से देखा और बोली, "मैं भी?" लियो ने सबसे बड़ा ब्लॉक उसकी तरफ बढ़ाया — क्योंकि शुरुआत हमेशा सबसे बड़े से होती है। बिया मुस्कुराई। उस गंभीर चेहरे में एक बहुत बड़ी मुस्कान छुपी थी।
सब झुक-झुककर देखते हैं

कहानी सुनने का वक्त आया तो सब गलीचे पर बैठ गए। मिस प्लम ने एक भालू की कहानी पढ़ी जिसे एक टोपी मिली थी। सब बच्चे हर पन्ने को देखने के लिए आगे झुक गए। मिया इतनी पास झुकी कि लियो ने फुसफुसाया, "दिख रहा है?" मिया ने फुसफुसाकर कहा, "सब दिख रहा है!"
धारीवाली को अलविदा

कहानी खत्म हुई। नाश्ते से पहले मिया ने एक बार और मछलीघर की तरफ देखा। धारीवाली मछली अभी भी गोल-गोल घूम रही थी। "कल मिलेंगे, धारीवाली," मिया ने धीरे से कहा। और उसके मन में कोई शक नहीं था — वो ज़रूर आएगी।